उर्दू शायरी · ग़ज़ल

goya laTon ki Dor se bandha hua hai chand

गोया लटों की डोर से बाँधा हुआ है चाँद

گویا لٹوں کی ڈور سے باندھا ہوا ہے چاند

शायर: Madhav Noor5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गोया लटों की डोर से बाँधा हुआ है चाँद
देखो स्याह ज़ुल्फ़ में कैसे फँसा है चाँद

पूनम के बाद देखा नहीं सात दिन उसे
मैं ने सुना है रूठ कर आधा हुआ है चाँद

पहले जमाल-ओ-नूर की बातों में गुम हुआ
फिर दाग़ दाग़ सुन के सिसकने लगा है चाँद

भोले के सर पे भी यही गुम्बद पे भी यही
तू क्यों सियासतों में उलझने लगा है चाँद

अम्माँ खड़ी है पास में थाली परोस कर
बरसों के बाद फिर मिरा मामा बना है चाँद