उर्दू शायरी · ग़ज़ल

labon se aashnai de raha hai

लबों से आश्नाई दे रहा है

لبوں سے آشنائی دے رہا ہے

शायर: Yashab Tamanna6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लबों से आश्नाई दे रहा है
वो लज़्ज़त इंतिहाई दे रहा है

मोहब्बत भी हुई कार-ए-मशक़्क़त
बदन थक कर दुहाई दे रहा है

चुराता है बदन मुझ से निगाहें
मुझे दिल भी सफ़ाई दे रहा है

कोई भर देगा अपनी क़ुर्बतों से
कोई ज़ख़्म-ए-जुदाई दे रहा है

कोई तो है जो इतनी सर्दियों में
बदन जैसी रज़ाई दे रहा है

कोई मुझ को 'यशब' अपनी रज़ा से
ख़ज़ानों तक रसाई दे रहा है