उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya bataen kya kamaya ishq mein

क्या बताएँ क्या कमाया इश्क़ में

کیا بتائیں کیا کمایا عشق میں (ردیف .. ی)

शायर: Hafeez Jauhar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या बताएँ क्या कमाया इश्क़ में
दर्द है दिल में न आँखों में नमी

क़ुर्ब में जिस के गुज़ारे रोज़-ओ-शब
अजनबी है इतने बरसों बाद भी

था मिरे दिल में कभी उस का मकाँ
मैं ने जिस को दूर से आवाज़ दी

अब तो वो मौसम पुराने हो गए
अब तो वो बातें हैं सारी ख़्वाब की

रब्त 'जौहर' उन से इतना रह गया
फ़ोन की घंटी बजी बजती रही