उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi shikwa to zer-e-lab hoga

कोई शिकवा तो ज़ेर-ए-लब होगा

کوئی شکوہ تو زیر لب ہوگا

शायर: A G Josh6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई शिकवा तो ज़ेर-ए-लब होगा
कुछ ख़मोशी का भी सबब होगा

मैं भी हूँ बज़्म में रक़ीब भी है
आख़िरी फ़ैसला तो अब होगा

आएँ मय-ख़ाने में कभी वाइ'ज़
हूर भी होगी और सब होगा

बोल ऐ मेरे दिल की तारीकी
तेरा सूरज तुलूअ' कब होगा

सुनता होगा सदाएँ उस दिल की
शाम-ए-तन्हाई में वो जब होगा

कब छटेंगी ये बदलियाँ ग़म की
साफ़ मतला ये 'जोश' कब होगा