उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi shai dil ko bahlati nahin hai

कोई शय दिल को बहलाती नहीं है

کوئی شے دل کو بہلاتی نہیں ہے

शायर: Bakhsh Layalpuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई शय दिल को बहलाती नहीं है
परेशानी की रुत जाती नहीं है

हमारे ख़्वाब चोरी हो गए हैं
हमें रातों को नींद आती नहीं है

कोई तितली कमाँ-दारों के डर से
फ़ज़ा में पंख फैलाती नहीं है

हर इक सूरत हमें भाती नहीं है
कोई सूरत हमें भाती नहीं है

जिस आज़ादी के नग़्मे हैं ज़बाँ पर
वो आज़ादी नज़र आती नहीं है

बदन बे-हरकत-ओ-बे-हिस पड़े हैं
लहू की बूँद गरमाती नहीं है

मुसलसल पोश की चाबुक-ज़नी से
मिरी आशुफ़्तगी जाती नहीं है

ज़वाल-ए-फ़िक्र-ओ-फ़न की 'बख़्श' तोहमत
जलाल-ए-हर्फ़ पर आती नहीं है