उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHun agar honge to kaam aaenge paimanon ke

ख़ूँ अगर होंगे तो काम आएँगे पैमानों के

خوں اگر ہوں گے تو کام آئیں گے پیمانوں کے

शायर: Habibur Rahman Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ूँ अगर होंगे तो काम आएँगे पैमानों के
हौसले कुछ तो निकल जाएँगे अरमानों के

एक हम हैं कि ब-जुज़ आप के सब हैं अपने
एक हैं आप न अपनों के न बेगानों के

शौक़-ए-मय था तो कहीं से हमें माँगे न मिली
तौबा कर ली है तो दर बाज़ हैं मय-ख़ानों के

जम्अ' फिर करते हैं अज्ज़ा-ए-परेशाँ दिल के
टुकड़े ले आते हैं टूटे हुए पैमानों के

चार तिनके थे नशेमन के सो वो जल भी चुके
बर्क़ क्यों फ़िक्र में है सोख़्ता-सामानों के