उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aashiyan tha humse hum the aashiyane ke liye

आशियाँ था हम से हम थे आशियाने के लिए

آشیاں تھا ہم سے ہم تھے آشیانے کے لئے

शायर: Habibur Rahman Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आशियाँ था हम से हम थे आशियाने के लिए
रोइए क्या अब क़फ़स में इस ज़माने के लिए

कार-फ़रमा हैं नियाज़-ए-इश्क़ की मजबूरियाँ
सज्दे ले कर मैं चला था आस्ताने के लिए

कश्मकश में है हयात-ओ-मौत की जान-ए-हज़ीं
आप आ जाएँ ज़रा क़िस्सा चुकाने के लिए

कोई होता है ख़रीदार-ए-मताअ'-ए-अहल-ए-दिल
दौलत-ए-दारैन लाते हैं लुटाने के लिए

हो क़फ़स की तीलियों पर भी निगाह-ए-लुत्फ़-ए-बर्क़
क्या नशेमन ही के तिनके थे जलाने के लिए