उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHuban ke bich jaanan mumtaz hai sarapa

ख़ूबाँ के बीच जानाँ मुम्ताज़ है सरापा

خوباں کے بیچ جاناں ممتاز ہے سراپا

शायर: Faez Dehlvi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ूबाँ के बीच जानाँ मुम्ताज़ है सरापा
अंदाज़-ए-दिलबरी में ए'जाज़ है सरापा

पल पल मटक के देखे डग डग चले लटक के
वो शोख़ छल छबीला तन्नाज़ है सरापा

तिरछी निगाह करना कतरा के बात सुनना
मज्लिस में 'आशिक़ों की अंदाज़ है सरापा

नैनों में उस की जादू ज़ुल्फ़ाँ में उस की फाँदा
दिल के शिकार में वो शहबाज़ है सरापा

ग़म्ज़ा निगह तग़ाफ़ुल अँखियाँ सियाह ओ चंचल
या रब नज़र न लागे अंदाज़ है सरापा

उस के ख़िराम ऊपर ताऊस मस्त हैगा
वो मीर दिल-रबाबी तन्नाज़ है सरापा

किश्त-ए-उमीद करता सरसब्ज़ सब्ज़ा-ए-ख़त
अंजाम-ए-हुस्न उस का आग़ाज़ है सरापा

वक़्त-ए-नज़ारा 'फ़ाएज़' दिलदार का यही है
बिस्तर नहीं बदन पर तन-बाज़ है सरापा