उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHub-ru jo ek ka mahbub nain

ख़ूब-रू जो एक का महबूब नइं

خوب رو جو ایک کا محبوب نئیں

शायर: Taban Abdul Hai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ूब-रू जो एक का महबूब नइं
ऐसे हरजाई से मिलना ख़ूब नइं

चोली नीची मत पहन ऐ जामा-ज़ेब
इस में छब तख़्ती का कुछ उस्लूब नइं

मैं तो तालिब दिल से हूँगा दीन का
दौलत-ए-दुनिया मुझे मतलूब नइं

सब्र कब तक हिज्र में तेरे करूँ
मैं तिरा आशिक़ हूँ कुइ अय्यूब नइं

यार की 'ताबाँ' ज़नख़दाँ को न चाह
देख कहता हूँ कुएँ में डूब नइं