उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHayalon ko tere mohlat agar den

ख़यालों को तिरे मोहलत अगर दें

خیالوں کو ترے مہلت اگر دیں

शायर: Faisal Azeem4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़यालों को तिरे मोहलत अगर दें
ये आँखों में लहू का रंग भर दें

हमें माज़ी के नग़्मे मत सुनाओ
ये आवाज़ें हमें पागल न कर दें

हमारे बस में हो तो शहर-ए-याराँ
तिरी रातों में भी हम नूर भर दें

जहाँ सर ही नहीं हों गर्दनों पर
वहाँ जुर्म-ए-ज़ईफ़ी किस के सर दें