उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHanqah mein sufi munh chhupae baiTha hai

ख़ानक़ाह में सूफ़ी मुँह छुपाए बैठा है

خانقاہ میں صوفی منہ چھپائے بیٹھا ہے

शायर: Kaif Bhopali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ानक़ाह में सूफ़ी मुँह छुपाए बैठा है
ग़ालिबन ज़माने से मात खाए बैठा है

क़त्ल तो नहीं बदला क़त्ल की अदा बदली
तीर की जगह क़ातिल साज़ उठाए बैठा है

उन के चाहने वाले धूप धूप फिरते हैं
ग़ैर उन के कूचे में साए साए बैठा है

वाए आशिक़-ए-नादाँ काएनात ये तेरी
इक शिकस्ता शीशे को दिल बनाए बैठा है

दूर बारिश ऐ गुलचीं वा है दीदा-ए-नर्गिस
आज हर गुल-ए-नर्गिस ख़ार खाए बैठा है