उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karta ghairon ke tamir ghar aadmi

करता ग़ैरों के ता'मीर घर आदमी

کرتا غیروں کے تعمیر گھر آدمی

शायर: Madhukar Shaidai7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

करता ग़ैरों के ता'मीर घर आदमी
कर के फ़ुट-पाथ पर ख़ुद बसर आदमी

इस क़दर आज बेकार इंसाँ हुआ
भीड़ में आ रहा अब नज़र आदमी

एक तूफ़ाँ में कितने मकाँ ढह गए
मुश्किलों से बना पाता घर आदमी

'ऐब ग़ैरों के है ढूँडने में लगा
अपने 'ऐबों से है बे-ख़बर आदमी

आज छोटे बड़ों का नहीं है अदब
अपनी तहज़ीब से बे-असर आदमी

मादर-ए-हिन्द पर जो भी क़ुर्बां हुआ
मर के भी हो गया वो अमर आदमी

साए में जिस के इंसान ज़िंदा रहे
इस लिए है लगाता शजर आदमी