उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kamaya luTaya bachaya nahin

कमाया लुटाया बचाया नहीं

کمایا لٹایا بچایا نہیں

शायर: Madhukar Shaidai7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कमाया लुटाया बचाया नहीं
मगर एक पैसा गँवाया नहीं

कभी कोई ख़्वाबों में आया नहीं
मुक़द्दर मिरा जगमगाया नहीं

करम ये रहा दोस्तों का मिरे
कभी एक पल मुस्कुराया नहीं

वो चाहत वो हसरत वो वा'दे वफ़ा
जिन्हें आज भी भूल पाया नहीं

'अयाँ ज़िंदगी का हर एक पृष्ठ है
ज़माने से हम ने छुपाया नहीं

कटा डाले सर हैं वतन के लिए
मगर सर को अपने झुकाया नहीं

है लहरों का एहसान 'मधुकर' बहुत
समुंदर डुबा मुझ को पाया नहीं