उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kal talak the jo KHub saya-dar

कल तलक थे जो ख़ूब साया-दार

کل تلک تھے جو خوب سایہ دار

शायर: Ejaz Tabish6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कल तलक थे जो ख़ूब साया-दार
आज ख़ुद जल रहे हैं वो अश्जार

आओ हम भी ख़रीद लें चल कर
लग रहा है ख़ुलूस का बाज़ार

अपने चेहरे छुपा के भाग चलो
आइनों से फ़ुज़ूल है तकरार

फिर कोई हादिसा हुआ शायद
बिक रहे हैं गली गली अख़बार

जब भी देखूँ उन्हें ये लगता है
जैसे देखा हो आज पहली बार

शायरी में समेट लो 'ताबिश'
ज़िंदगी के नए नए अफ़्कार