उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jalta suraj kya kahta hai uske tewar to samjho

जलता सूरज क्या कहता है उस के तेवर तो समझो

جلتا سورج کیا کہتا ہے اس کے تیور تو سمجھو

शायर: Ejaz Tabish8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जलता सूरज क्या कहता है उस के तेवर तो समझो
फूलों जैसे चेहरे ले कर घर से बाहर मत निकलो

सूरज की पहली किरनें ही खा जाएँगी शबनम को
तुम उस को मेरा जानो या तुम उस को मोती समझो

क्या पीतल है क्या सोना है ये ख़ुद ही जांचो परखो
अपनी 'अक़्लें अख़बारों के हाथों गिरवी मत रक्खो

तुम भी कितने सादा-दिल हो मेरी बस्ती के लोगो
मिट्टी के घर-बार बना कर बादल से पानी माँगो

जो दुनिया के मन भाता हो ऐसा कोई रूप भरो
घर से जब बाहर निकलो तो असली चेहरे घर रख दो

अपना जीवन आज के दिन है जो भी करना है कर लो
कल तो इक धोका है लोगो कल की मत उम्मीद रखो

आने वाला लम्हा शायद कल हम पर भी वार करे
उस से लड़ने की तय्यारी बेहतर है गर आज करो

दौलत की पूजा करते हैं इस बस्ती के सारे लोग
इस के हर इक चौराहे पर सोने की मूरत रख दो