उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahin wo dekh le daman ko tar karte hue

कहीं वो देख ले दामन को तार करते हुए

کہیں وہ دیکھ لے دامن کو تار کرتے ہوئے

शायर: Osaama ameer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहीं वो देख ले दामन को तार करते हुए
बहार में भी हैं हम इंतिज़ार करते हुए

फ़ज़ा नहीं है किसी तरह भी शफ़क़-अंदाम
पलट रहे हैं उसे सोगवार करते हुए

अब और क्या ख़स-ओ-ख़ाशाक हो रहेंगे हम
तमाम हो तो गए इंतिज़ार करते हुए

वो आइना है सो हम उस के सामने आए
हज़ार तरह से दिल को ग़ुबार करते हुए

गुज़ारते हैं ये शब शोरिश-ए-तमन्ना में
दिल-ओ-निगाह को बे-इख़्तियार करते हुए

नहीं है गर्दिश-ए-अय्याम की ख़बर उस को
कि दिन गुज़रता है क्या क्या शुमार करते हुए

और उस के नक़्श पे लग़्ज़िश हुनर ने पाई है
कि रंग हेच लगे हैं निखार करते हुए