उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahin pyar ka koi rishta to hoga

कहीं प्यार का कोई रिश्ता तो होगा

کہیں پیار کا کوئی رشتہ تو ہوگا

शायर: Badnam Nazar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहीं प्यार का कोई रिश्ता तो होगा
किसी को कभी तुम ने चाहा तो होगा

हवाओं में उड़ना भी आसाँ नहीं है
परिंदा कहीं थक के बैठा तो होगा

बहुत ही ख़फ़ा है पर उस ने किसी से
झिझक कर मिरा हाल पूछा तो होगा

मसाजिद मनादिर तड़पती ये लाशें
ख़ुदा ने ये मंज़र भी देखा तो होगा