उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaam yahi hai sham sawere

काम यही है शाम सवेरे

کام یہی ہے شام سویرے

शायर: Kaif Bhopali4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काम यही है शाम सवेरे
तेरी गली के सौ सौ फेरे

सामने वो हैं ज़ुल्फ़ बिखेरे
कितने हसीं हैं आज अंधेरे

हम तो हैं तेरे पूजने वाले
पाँव न पड़वा तेरे मेरे

दिल को चुराया ख़ैर चुराया
आँख चुरा कर जा न लुटेरे