उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo junun tha so wo ab nahin

जो जुनूँ था सो वो अब नहीं

جو جنوں تھا سو وہ اب نہیں

शायर: Ibn-e-Ummeed4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो जुनूँ था सो वो अब नहीं
मुझे अब तुम्हारी तलब नहीं

तुझे क्या ख़बर मिरे हाल की
जो कहा तुझे वही सब नहीं

ये अलग कि तुझ को सदा न दें
हमें याद वर्ना तू कब नहीं

मैं ख़ुशी में घिर के उदास हूँ
कोई और इस का सबब नहीं