उर्दू शायरी · ग़ज़ल

banda putla KHata ka hota hai

बंदा पुतला ख़ता का होता है

بندہ پتلا خطا کا ہوتا ہے

शायर: Ibn-e-Ummeed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बंदा पुतला ख़ता का होता है
मसअला तो अना का होता है

वही मस्तूल ढीला करते हैं
जिन पे तकिया बला का होता है

हम यूँही ख़्वाब बुनते रहते हैं
खेल सारा क़ज़ा का होता है

सोख़्ता तन की राख पर शायद
ज़ुल्म बाक़ी हवा का होता है

जिस को शबनम मिले न हिस्से की
फूल वो अध-खिला सा होता है