उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ban ke hasrat sama gaya ek shaKHs

बन के हसरत समा गया इक शख़्स

بن کے حسرت سما گیا اک شخص

शायर: Ibn-e-Ummeed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बन के हसरत समा गया इक शख़्स
मुझ को आँसू बना गया इक शख़्स

सोच हाले पे इंतिज़ार लिखा
और रस्ते दिखा गया इक शख़्स

मेरे जीवन की डाइरी में लिखा
बाब-ए-क़िस्मत मिटा गया इक शख़्स

कर्बला में है रोज़गार-ए-अलम
काम कैसा लगा गया इक शख़्स

मैं ने उस से वफ़ा का ज़िक्र क्या
पर बुरा क्यूँ मना गया इक शख़्स

कर के जीवन से बे-नियाज़ मुझे
जीने का ढब सिखा गया इक शख़्स