उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo bujh gae unhin ko charaghon ka nam do

जो बुझ गए उन्हीं को चराग़ों का नाम दो

جو بجھ گئے انہیں کو چراغوں کا نام دو

शायर: Lateef Ahmad Subhani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो बुझ गए उन्हीं को चराग़ों का नाम दो
बे-चेहरगी को अपनी गुलाबों का नाम दो

जो है हक़ीक़ी उस को तो अब भूल जाओ तुम
बे-जान पत्थरों को ख़ुदाओं का नाम दो

हमदर्दियाँ ख़ुलूस-ओ-मोहब्बत कि दोस्ती
इस दौर में इन्हें भी गुनाहों का नाम दो

है वक़्त का तक़ाज़ा बुरी हरकतों को तुम
जिद्दत कहो हसीन अदाओं का नाम दो

दहशत-गरी जहाँ ये पनपती है रात दिन
संतों का मुँह कहो कि गुफाओं का नाम दो

इस में घुटन है ज़हर है गर्द-ओ-ग़ुबार है
फिर भी इसे शगुफ़्ता फ़ज़ाओं का नाम दो

डूबे थे फिर भी साफ़ निकल आए ऐ 'लतीफ़'
इस को अदा कहो कि दुआओं का नाम दो