उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jism ki qaid se ek roz guzar jaoge

जिस्म की क़ैद से इक रोज़ गुज़र जाओगे

جسم کی قید سے اک روز گزر جاؤ گے

शायर: Kaif Azimabadi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस्म की क़ैद से इक रोज़ गुज़र जाओगे
ख़ुश्क पत्तों की तरह तुम भी बिखर जाओगे

तुम समुंदर की रिफ़ाक़त पे भरोसा न करो
तिश्नगी लब पे सजाए हुए मर जाओगे

वक़्त इस तरह बदल देगा तुम्हारे ख़द-ओ-ख़ाल
अपनी तस्वीर जो देखोगे तो डर जाओगे