उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis pe teri shamshir nahin hai

जिस पे तिरी शमशीर नहीं है

جس پہ تری شمشیر نہیں ہے

शायर: Kaif Bhopali8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस पे तिरी शमशीर नहीं है
उस की कोई तौक़ीर नहीं है

उस ने ये कह कर फेर दिया ख़त
ख़ून से क्यूँ तहरीर नहीं है

ज़ख़्म-ए-जिगर में झाँक के देखो
क्या ये तुम्हारा तीर नहीं है

ज़ख़्म लगे हैं खुलने गुलचीं
ये तो तिरी जागीर नहीं है

शहर में यौम-ए-अमन है वाइज़
आज तिरी तक़रीर नहीं है

ऊदी घटा तो वापस हो जा
आज कोई तदबीर नहीं है

शहर मोहब्बत का यूँ उजड़ा
दूर तलक तामीर नहीं है

इतनी हया क्यूँ आईने से
ये तो मिरी तस्वीर नहीं है