उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jina kab tak muhaal hoga

जीना कब तक मुहाल होगा

جینا کب تک محال ہوگا

शायर: A G Josh6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जीना कब तक मुहाल होगा
आख़िर इक दिन विसाल होगा

गर न टूटे ये शीशा-ए-दिल
तेरा हुस्न कमाल होगा

तुम तो तड़पा के जा रहे हो
दिल ये कैसे बहाल होगा

छूने वाला तिरी जबीं को
मेरा दस्त-ए-ख़याल होगा

तेरे लब पे रहे ख़मोशी
मेरे लब पे सवाल होगा

उस की निभती भी है किसी से
'जोश' क्या तेरा हाल होगा