उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jawan hai raat saqiya sharab la sharab la

जवाँ है रात साक़िया शराब ला शराब ला

جواں ہے رات ساقیا شراب لا شراب لا

शायर: Madan pal4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जवाँ है रात साक़िया शराब ला शराब ला
ज़रा सी प्यास तो बुझा शराब ला शराब ला

तिरे शबाब पर सदा करम रहे बहार का
तुझे लगे मिरी दुआ शराब ला शराब ला

यहाँ कोई न जी सका न जी सकेगा होश में
मिटा दे नाम होश का शराब ला शराब ला

तिरा बड़ा ही शुक्रिया पिलाए जा पिलाए जा
न ज़िक्र कर हिसाब का शराब ला शराब ला