उर्दू शायरी · ग़ज़ल

din aa gae shabab ke aanchal sanbhaaliye

दिन आ गए शबाब के आँचल सँभालिये

دن آ گئے شباب کے آنچل سنبھالیے

शायर: Madan pal4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिन आ गए शबाब के आँचल सँभालिये
होने लगी है शहर में हलचल सँभालिये

चलिए सँभल सँभल के कठिन राह-ए-इश्क़ है
नाज़ुक बड़ी है आप की पाइल सँभालिये

सज-धज के आप निकले सर-ए-राह ख़ैर हो
टकरा न जाए आप का पागल सँभालिये

घर से न जाओ दूर किसी अजनबी के साथ
बरसेंगे ज़ोर ज़ोर से बादल सँभालिये