उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj kal aap sath chalte nahin

आज कल आप साथ चलते नहीं

آج کل آپ ساتھ چلتے نہیں

शायर: Madan pal4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज कल आप साथ चलते नहीं
इस लिए लोग हम से जलते नहीं

कैसे ग़ज़लों की रुत जवाँ होगी
जब निगाहों के तीर चलते नहीं

तुम को दुनिया कहेगी दीवाना
रुत बदलती है तुम बदलते नहीं

शहरों शहरों हमारा चेहरा है
और हम घर से भी निकलते नहीं