उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab main uske ghar ko jaya karta tha

जब मैं उस के घर को जाया करता था

جب میں اس کے گھر کو جایا کرتا تھا

शायर: Vihan Gupta5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब मैं उस के घर को जाया करता था
दरवाज़ा ख़ुद ही खुल जाया करता था

वो उस का किरदार निभाया करती थी
मैं अपना किरदार निभाया करता था

वो चूल्हे में रोटी सेका करती थी
मैं जंगल से लकड़ी लाया करता था

खुल जाते थे पतझड़ के मौसम में भी
मैं पेड़ों को शेर सुनाया करता था

जब जब मैं रोया करता था साहिल पर
दरिया मुझ को देख के रोया करता था