उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab kisi ek ko riha kiya jae

जब किसी एक को रिहा किया जाए

جب کسی ایک کو رہا کیا جائے

शायर: Tahzeeb Hafi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब किसी एक को रिहा किया जाए
सब असीरों से मशवरा किया जाए

रह लिया जाए अपने होने पर
अपने मरने पे हौसला किया जाए

'इश्क़ करने में क्या बुराई है
हाँ किया जाए बारहा किया जाए

मेरा इक यार सिंध के उस पार
ना-ख़ुदाओं से राब्ता किया जाए

मेरी नक़लें उतारने लगा है
आइने का बताओ क्या किया जाए

ख़ामुशी से लदा हुआ इक पेड़
इस से चल कर मुकालिमा किया जाए