उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab kabhi zikr yar ka aaya

जब कभी ज़िक्र यार का आया

جب کبھی ذکر یار کا آیا

शायर: A G Josh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब कभी ज़िक्र यार का आया
एक झोंका बहार का आया

इश्क़ कच्चे घड़े पे डूब गया
लम्हा जब इंतिज़ार का आया

आ गए दिल में वसवसे कितने
वक़्त जब ए'तिबार का आया

पास तीर-ओ-कमाँ न थे अपने
जब भी मौसम शिकार का आया

हम ने ठुकरा दिया जहाँ को 'जोश'
मरहला जब वक़ार का आया