उर्दू शायरी · ग़ज़ल

iztirab-e-KHud-numai-o-haya mein farq hai

इज़्तिराब-ए-ख़ुद-नुमाई-ओ-हया में फ़र्क़ है

اضطراب خود نمائی و حیا میں فرق ہے

शायर: Urooj Zaidi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इज़्तिराब-ए-ख़ुद-नुमाई-ओ-हया में फ़र्क़ है
हम समझते हैं जो उन की हर अदा में फ़र्क़ है

दोस्तो इज्माल की तफ़्सील का मौक़ा' नहीं
मैं ये कहता हूँ कि इख़्लास-ओ-रिया में फ़र्क़ है

एक इक़दाम-ए-यक़ीं है दूसरा शक-आश्ना
ए'तिराफ़-ए-लग़्ज़िश-ए-‘उज़्र-ओ-ख़ता में फ़र्क़ है

हाल चेहरे से 'अयाँ होता है लफ़्ज़ों से नहीं
या'नी अब मा’नन सुकूत-ओ-इल्तिजा में फ़र्क़ है

एक ही 'आलम में हैं सब जादा-पैमा-ए-'अदम
वैसे होने को यहाँ शाह-ओ-गदा में फ़र्क़ है

एक तूफ़ानों पे क़ादिर एक तूफ़ाँ-आज़मा
ये हक़ीक़त है ख़ुदा-ओ-नाख़ुदा में फ़र्क़ है

इस का पहले फ़ैसला हो क़ाफ़िला क्यूँकर लुटा
ये ग़लत है रहज़न-ओ-जादा-नुमा में फ़र्क़ है

चढ़ते सूरज के पुजारी डूबता सूरज भी देख
ये बताना है ज़वाल-ओ-इर्तिक़ा में फ़र्क़ है

वज्ह-ए-महरूमी है मेरी शान-ए-इस्तिग़ना 'उरूज'
दस्त-कश में और दस्त-ए-ना-रसा में फ़र्क़ है