उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek sharar har nafas mein aata hai

इक शरर हर नफ़स में आता है

اک شرر ہر نفس میں آتا ہے

शायर: Tabish Dehlvi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक शरर हर नफ़स में आता है
सोज़-ए-जाँ किस के बस में आता है

सर-ब-सर मैं असीर होता हूँ
जब भी कोई क़फ़स में आता है

कार-ओ-अंजाम-ए-कार ना-मा'लूम
कौन इस पेश-ओ-पस में आता है

सैंकड़ों ख़्वाहिशें हज़ार अरमान
दिल कहाँ मेरे बस में आता है

संग-ए-तिफ़्ली से कुछ 'अजीब मज़ा
समर-ए-नीम-रस में आता है

उन का दामन मिरा गरेबाँ हो
जब कहीं दस्तरस में आता है

रहरव-ए-शौक़ मो'तबर ही सही
वो भी कू-ए-हवस में आता है

दाइमी रोज़-ए-वस्ल ऐ 'ताबिश'
देखिए किस बरस में आता है