उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek haweli hun us ka dar bhi hun

इक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ

اک حویلی ہوں اس کا در بھی ہوں

शायर: Tahzeeb Hafi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ
ख़ुद ही आँगन ख़ुद ही शजर भी हूँ

अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँ
मैं किनारा भी हूँ भँवर भी हूँ

आसमाँ और ज़मीं की वुसअत देख
मैं इधर भी हूँ और उधर भी हूँ

ख़ुद ही मैं ख़ुद को लिख रहा हूँ ख़त
और मैं अपना नामा-बर भी हूँ

दास्ताँ हूँ मैं इक तवील मगर
तू जो सुन ले तो मुख़्तसर भी हूँ

एक फलदार पेड़ हूँ लेकिन
वक़्त आने पे बे-समर भी हूँ