उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hujum-e-dard mila imtihan aisa tha

हुजूम-ए-दर्द मिला इम्तिहान ऐसा था

ہجوم درد ملا امتحان ایسا تھا

शायर: Ghayas Anjum6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुजूम-ए-दर्द मिला इम्तिहान ऐसा था
मगर वो चुप ही रहा बे-ज़बान ऐसा था

किसी की इज़्ज़त-ओ-नामूस पर न आँच आई
लुटा तो उफ़ भी न की मेहरबान ऐसा था

ज़माना गुज़रा मगर दाग़ रह गया दिल पर
न मिट सका किसी सूरत निशान ऐसा था

बदन की शाख़ से उस के किरन जो लिपटी थी
वो सह सका न उसे धान-पान ऐसा था

मता-ए-ज़ीस्त लुटा दी गई मगर उस ने
ज़रा भी क़द्र न की बद-गुमान ऐसा था

नज़र-शनास था कैसा कि उम्र भर 'अंजुम'
भुला सका न उसे मेहमान ऐसा था