उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hue hain ja ke aashiq ab to hum us shoKH chanchal ke

हुए हैं जा के आशिक़ अब तो हम उस शोख़ चंचल के

ہوئے ہیں جا کے عاشق اب تو ہم اس شوخ چنچل کے

शायर: Taban Abdul Hai7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुए हैं जा के आशिक़ अब तो हम उस शोख़ चंचल के
सितमगर बे-मुरव्वत बे-वफ़ा बे-रहम अचपल के

ग़ज़ालों को तिरी आँखें से कुछ निस्बत नहीं हरगिज़
कि ये आहू हैं शहरी और वे वहशी हैं जंगल के

गिरफ़्तारी हुई है दिल को मेरे बे-तरह इस से
कि आए पेच में कहते ही उन की ज़ुल्फ़ के बल के

ये दौलत-मंद अगर शब को नहीं यारो तो फिर क्या है
कि हैं ये चाँदनी रातों को भी मुहताज मिशअल के

तुम्हारे दर्द-ए-सर से संदली-रंगो अगर जी दूँ
तू छापे क़ब्र पर देना मिरी तुम आ के संदल के

कोई इस को कहे है दाम कुइ ज़ंजीर कुइ सुम्बुल
हज़ारों नाम हैं काफ़िर तिरी ज़ुल्फ़-ए-मुसलसल के

बयाबाँ बन हमें उल्फ़त नहीं है शहर से हरगिज़
तरह मजनूँ के 'ताबाँ' हम तो दीवाने हैं जंगल के