उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hawa ke honT khulen saat-e-kalam to aae

हवा के होंट खुलें साअत-ए-कलाम तो आए

ہوا کے ہونٹ کھلیں ساعت کلام تو آئے

शायर: Ghalib Ayaz4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हवा के होंट खुलें साअत-ए-कलाम तो आए
ये रेत जैसा बदन आँधियों के काम तो आए

मुनाफ़िक़त की सभी तोहमतें मुझे दे दे
मिरे तुफ़ैल रफ़ीक़ों में तेरा नाम तो आए

उसे उदास न कर दे ये मेरी सुस्त-रवी
मैं अब के सुस्त चलूँ वो सुबुक-ख़िराम तो आए

ग़म-ए-हयात ग़म-ए-रोज़गार बे-वतनी
सुकून से जो ढले काश ऐसी शाम तो आए