उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hashmat-andam ye ek tarz-e-faramoshi hai

हशमत-अंदाम ये इक तर्ज़-ए-फ़रामोशी है

حشمت اندام یہ اک طرز فراموشی ہے

शायर: Osaama ameer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हशमत-अंदाम ये इक तर्ज़-ए-फ़रामोशी है
मेरी वहशत में इज़ाफ़ा तिरी ख़ामोशी है

पेशतर ख़्वाब के इक ख़्वाब-ए-दिगर है पैहम
सर-ब-सर कोई नहीं है गहे सरगोशी है

दूर इक धुंद है और धुंद से थोड़ा आगे
बाग़ है बाग़ में तू है तिरी सरगोशी है

वो बदन अतलस-ओ-कमख़्वाब में पोशीदा हुआ
हुस्न-ए-नज़्ज़ारा कुछ ऐसा है कि मदहोशी है

रात हर रंग में तफ़्हीम का लम्हा है मुझे
सुब्ह की पहली किरन बा'इस-ए-जाँ-कोशी है

गो कि मैं चाक-गरेबाँ नज़र आता हूँ तुझे
चश्म-ए-'उश्शाक़ अगर हो तो ये ख़ुश-पोशी है