उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har haqiqat majaz ho jae

हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए

ہر حقیقت مجاز ہو جائے

शायर: Faiz Ahmad Faiz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए
काफ़िरों की नमाज़ हो जाए

दिल रहीन-ए-नियाज़ हो जाए
बेकसी कारसाज़ हो जाए

मिन्नत-ए-चारा-साज़ कौन करे
दर्द जब जाँ-नवाज़ हो जाए

इश्क़ दिल में रहे तो रुस्वा हो
लब पे आए तो राज़ हो जाए

लुत्फ़ का इंतिज़ार करता हूँ
जौर ता हद्द-ए-नाज़ हो जाए

उम्र बे-सूद कट रही है 'फ़ैज़'
काश इफ़शा-ए-राज़ हो जाए