उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har ek chehra yahan dard ki kitab lage

हर एक चेहरा यहाँ दर्द की किताब लगे

ہر ایک چہرہ یہاں درد کی کتاب لگے

शायर: Badnam Nazar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर एक चेहरा यहाँ दर्द की किताब लगे
तुम्हारा शहर तो इक शहर-ए-इज़्तिराब लगे

ये कोर-चश्मी है या जलते सूरजों का असर
कोई भी शक्ल न अब बिंत-ए-माहताब लगे

न जाने क्यों मिरा लहजा है सख़्त सख़्त इतना
कि इल्तिमास का अंदाज़ भी ‘इताब लगे

ये बाँझ बाँझ से बादल ये रेत रेत ज़मीं
बबूल की ये जगह है कहाँ गुलाब लगे

हर एक सम्त धुआँ सा है ना-उमीदी का
हर एक मंज़िल-ए-उम्मीद अब सराब लगे

ये किस मक़ाम पे ले आई आगही मुझ को
न संग संग लगे और न आब आब लगे

न वो ही वो है न मैं मैं न तुम ही तुम बदनाम
सभी के चेहरे पे हैं सैकड़ों नक़ाब लगे