उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum un se agar mil baiThe hain kya dosh hamara hota hai

हम उन से अगर मिल बैठे हैं क्या दोश हमारा होता है

ہم ان سے اگر مل بیٹھے ہیں کیا دوش ہمارا ہوتا ہے

शायर: Ibn-e-Insha4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम उन से अगर मिल बैठे हैं क्या दोश हमारा होता है
कुछ अपनी जसारत होती है कुछ उन का इशारा होता है

कटने लगीं रातें आँखों में देखा नहीं पलकों पर अक्सर
या शाम-ए-ग़रीबाँ का जुगनू या सुब्ह का तारा होता है

हम दिल को लिए हर देस फिरे इस जिंस के गाहक मिल न सके
ऐ बंजारो हम लोग चले हम को तो ख़सारा होता है

दफ़्तर से उठे कैफ़े में गए कुछ शेर कहे कुछ कॉफ़ी पी
पूछो जो मआश का 'इंशा'-जी यूँ अपना गुज़ारा होता है