उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hasil-e-umr-e-rawan hai teri furqat hum ko

हासिल-ए-'उम्र-ए-रवाँ है तिरी फ़ुर्क़त हम को

حاصل عمر رواں ہے تری فرقت ہم کو

शायर: Osaama ameer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हासिल-ए-'उम्र-ए-रवाँ है तिरी फ़ुर्क़त हम को
लुत्फ़ कुछ और है इस में पए-वहशत हम को

अब उसी बज़्म में बातें हैं हमारे दिल की
कभी जिस बज़्म में था शिकवा-ए-'इज़्ज़त हम को

दख़्ल ख़ासा है गुल-ओ-मय का फ़रावानी में
एक ही वक़्त में बाहम हैं ये रहमत हम को

सतवत-ए-'इश्क़ में हर रंग-ए-विसाल ऐसा था
गर्दन-ए-शौक़ पे नाख़ुन हैं शहादत हम को

का'बा-ओ-दैर से बढ़ कर है हमें 'मीर' का हिन्द
इक हक़ीक़त है हमारी ये रिवायत हम को