उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haalat ye kahan sawaliya hai

हालत ये कहाँ सवालिया है

حالت یہ کہاں سوالیہ ہے

शायर: Osaama ameer9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हालत ये कहाँ सवालिया है
ये मैं हूँ ये ज़िंदगी सज़ा है

अब इस में भी क्या मशिय्यत-ए-ख़ास
क्यों कहिए ख़ुदा का फ़ैसला है

जिस बाग़ से मैं खिला हुआ हूँ
वो बाग़ तमाम हो गया है

कम पड़ गई ज़िंदगी हमारी
ये हिज्र तो हिज्र से सिवा है

ये दिल है बे-ग़ायती से पैहम
अब शिकवा-ए-ज़िंदगी भी क्या है

शायद ये मौसम-ए-जुनूँ है
आँखों में बहार की फ़ज़ा है

बेहतर तो ये है घर में रहिए
बाज़ार है और रास्ता है

गुम-गश्ता बहुत हैं दिन हमारे
पहचान ही एक मसअला है

वो झाँक रहा है पैरहन से
ये रम्ज़ हमें विसालिया है