उर्दू शायरी · ग़ज़ल

guzar gae jo wahi the hisab mein mere din

गुज़र गए जो वही थे हिसाब में मिरे दिन

گزر گئے جو وہی تھے حساب میں مرے دن

शायर: Osaama ameer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुज़र गए जो वही थे हिसाब में मिरे दिन
दिल-ए-शिकस्ता तिरे पेच-ओ-ताब में मिरे दिन

मैं वैसे ख़ुद भी ज़माने को था भुलाए हुए
तो क्यों लगे थे मिरे एहतिसाब में मिरे दिन

दबीज़ धुंद में इक रंज-ए-मुस्तक़िल था मुझे
जो बह रहे थे किसी और बाब में मिरे दिन

गली उदास थी और दो क़दम था मय-ख़ाना
भटक रहे थे मगर इज़्तिराब में मिरे दिन

उन्हें ख़याल की रा'नाइयों में होना था
पड़े हुए थे किसी पेच-ओ-ताब में मिरे दिन

मुझे वदी’अत-ए-बे-इंतिहा थी बहते हुए
उस इक निगह से बहम थे शराब में मिरे दिन

खुली जो आँख तो कुछ और ही हक़ीक़त थी
कि ख़्वाब से नज़र आए थे ख़्वाब में मिरे दिन