उर्दू शायरी · ग़ज़ल

garmi-e-shauq-e-nazara ka asar to dekho

गर्मी-ऐ-शौक़-ऐ-नज़ारा का असर तो देखो

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शायर: Faiz Ahmad Faiz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गर्मी-ऐ-शौक़-ऐ-नज़ारा का असर तो देखो
गुल खिले जाते हैं वो साया-ए-तर तो देखो

ऐसे नादाँ भी न थे जाँ से गुज़रने वाले
नासेहो पंद-गरो राहगुज़र तो देखो

वो तो वो है तुम्हें हो जाएगी उल्फ़त मुझ से
इक नज़र तुम मिरा महबूब-ए-नज़र तो देखो

वो जो अब चाक गरेबाँ भी नहीं करते हैं
देखने वालो कभी उन का जिगर तो देखो

दामन-ए-दर्द को गुलज़ार बना रक्खा है
आओ इक दिन दिल-ए-पुर-ख़ूँ का हुनर तो देखो

सुब्ह की तरह झमकता है शब-ए-ग़म का उफ़ुक़
'फ़ैज़' ताबिंदगी-ए-दीदा-ए-तर तो देखो