उर्दू शायरी · ग़ज़ल

faza-e-gulshan-e-maqtal nashat-e-dida-o-dil hai

फ़ज़ा-ए-गुलशन-ए-मक़्तल नशात-ए-दीदा-ओ-दिल है

فضائے گلشن مقتل نشاط دیدہ و دل ہے

शायर: Pandit Tribhuvannath Zutshi Zar Dehlvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़ज़ा-ए-गुलशन-ए-मक़्तल नशात-ए-दीदा-ओ-दिल है
कि जाँ-परवर बहार-ए-सब्ज़ा-ए-शमशीर-ए-क़ातिल है

बहार आई चमन में नग़्मा-संजी-ए-‘अनादिल है
पस-ए-दीवार-ए-ज़िंदान-ए-जुनूँ शोर-ए-सलासिल है

नहीं कोई ठिकाना रहरवान-ए-राह-ए-उल्फ़त का
बिठा दे जिस जगह वामांदगी वो उन की मंज़िल है

हमारी बे-ज़बानी है ज़बान-ए-हाल से गोया
निगाह-ए-वापसीं तो तर्जुमान-ए-हसरत-ए-दिल है