उर्दू शायरी · ग़ज़ल

anal-haq juzw-e-la-yanfak bana hai mere iqan ka

अनल-हक़ जुज़्व-ए-ला-यंफक बना है मेरे ईक़ाँ का

انا الحق جزو‌ لا ینفک بنا ہے میرے ایقاں کا

शायर: Pandit Tribhuvannath Zutshi Zar Dehlvi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अनल-हक़ जुज़्व-ए-ला-यंफक बना है मेरे ईक़ाँ का
यही है क़ुल-हुवल्लाहु-अहद मस्तों के क़ुरआँ का

अलिफ़ अल-हम्द का क़श्क़ा है मेरे नूर-ए-ईमाँ का
बना हम-रिश्ता ज़ुन्नार-ए-गुलू तार-ए-रग-ए-जाँ का

अलम-नशरह हुआ सिर्र-ए-ख़फ़ी हिज़्यान-ए-मस्ती में
असर था 'ज़ार' ये शुर्ब-ए-शराब-ए-हाल-ए-विज्दाँ का