उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek pal ja na kahun nain sun ai nur-e-basar

एक पल जा न कहूँ नैन सूँ ऐ नूर-ए-बसर

ایک پل جا نہ کہوں نین سوں اے نور بصر

शायर: Faez Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक पल जा न कहूँ नैन सूँ ऐ नूर-ए-बसर
टुक न हो इस दिल-ए-तारीक सूँ ऐ बद्र-ए-बदर

तेरी इस सुब्ह बिना गोश-ओ-ख़त-ए-मुश्कीं सूँ
सैर करता हूँ 'अजब शाम-ओ-सहर शाम-ओ-सहर

जल के मैं सुर्मा हुआ बल्कि हुआ काजल भी
ख़ाना-ए-चश्म में तुझ पाऊँ जो टुक राह मगर

राह-दाराँ लेवें हर गाम में जीव का हासिल
हेगा इस राह में ऐ 'उम्र-ए-अबद जाँ का ख़तर

क़िबले सूँ मूँह फिराया तिरे मुख की जानिब
किया ज़ाहिद ने मके सूँ सू-ए-बुत-ख़ाना सफ़र

चाँद सूरज की रख 'ऐनक कूँ सदा पीर-ए-फ़लक
ख़म हो करता है नज़र ताकि दिखे तेरी कमर