उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dushman ke raston ka bhi patthar haTaenge

दुश्मन के रास्तों का भी पत्थर हटाएँगे

دشمن کے راستوں کا بھی پتھر ہٹائیں گے

शायर: Zaheer Alam4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुश्मन के रास्तों का भी पत्थर हटाएँगे
हम चलते फिरते राह में नेकी कमाएँगे

दुश्वार हो गया है खिलौने ख़रीदना
अब कैसे बच्चे गुड़िया की शादी रचाएँगे

पापा खिलौने बेच के आटा ख़रीद लो
भूके हैं घर के लोग ये किस काम आएँगे

दिन दोस्तों में काट भी लेंगे तो रात को
तन्हाइयों में आप बहुत याद आएँगे