उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aise waison ko yahan hum nahin ginte sahab

ऐसे वैसों को यहाँ हम नहीं गिनते साहब

ایسے ویسوں کو یہاں ہم نہیں گنتے صاحب

शायर: Zaheer Alam5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसे वैसों को यहाँ हम नहीं गिनते साहब
आप अच्छे हैं बहुत अच्छे हैं होंगे साहब

किस के मिलने की ख़ुशी किस के बिछड़ने का ग़म
टूटते रहते हैं मिट्टी के खिलौने साहब

तह-ब-तह गर्द गुनाहों की जमी है उस पर
जा-नमाज़ अपनी ज़रा और झटकिए साहब

बातों बातों ही में क्या जान निकालोगे मिरी
हो चुकी बात ज़रा दूर सरकिये साहब

तुम हो 'आलम' वही आवारा तबीअत वाले
ये बताओ मुझे तुम हो गए कब से साहब